Report By: Nadeem Naqvi
सरस्वती में एआरटी और बांझपन प्रबंधन पर राष्ट्रीय सीएमई आयोजित
विशेषज्ञों ने साझा की आधुनिक चिकित्सा की नई तकनीकें
देशभर के विशेषज्ञों ने स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को दिया प्रशिक्षण
हापुड़। सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल हापुड़ के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा जीनोविया आईएसएआर राष्ट्रीय पीजी शिक्षण पहल के अंतर्गत सहायक प्रजनन तकनीक एवं बांझपन प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को आधुनिक प्रजनन चिकित्सा, नैदानिक कौशल और साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों की नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराना था।
कार्यक्रम में प्रजनन शरीर क्रिया विज्ञान, ओवेरियन रिजर्व असेसमेंट, कंट्रोल्ड ओवेरियन स्टिम्युलेशन, आईवीएफ लैब वर्कफ़्लो, भ्रूण विकास, पुरुष बांझपन, इंफर्टिलिटी अल्ट्रासाउंड, एआरटी की जटिलताओं तथा नैतिक एवं कानूनी पहलुओं पर विशेषज्ञों ने विस्तृत व्याख्यान दिए। मेरठ की आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. ईशा तथा नई दिल्ली की वरिष्ठ स्त्री रोग एवं आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. नीति विजय ने आधुनिक आईवीएफ तकनीकों और बांझपन प्रबंधन पर अपने अनुभव साझा किए।
सीएमई में इंटरैक्टिव लेक्चर, क्लीनिकल केस डिस्कशन, शैक्षणिक वीडियो और प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किए गए, जिससे विद्यार्थियों को व्यवहारिक प्रशिक्षण का अवसर मिला। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और फैकल्टी सदस्यों ने भाग लिया।
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. पारिधि गर्ग ने कहा कि ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम भविष्य के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और गुणवत्तापूर्ण रोगी देखभाल के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संस्थान की प्राचार्या डॉ. बरखा गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट मेजर जनरल डॉ. चरनजीत सिंह आहलूवालिया, सीनियर एडवाइजर ब्रिगेडियर डॉ. आरके सहगल, निदेशक रघुवर दत्त और महाप्रबंधक एन वर्धराजन ने आयोजन की सफलता पर विभाग को बधाई दी। संस्थापक एवं चेयरमैन डॉ. जे. रामचंद्रन तथा वाइस चेयरपर्सन रम्या रामचंद्रन ने चिकित्सा शिक्षा में नवाचार और कौशल विकास को समय की आवश्यकता बताते हुए भविष्य में भी ऐसे राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।













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